किसी की सोच बदलने की शुरुआत तर्कों से नहीं, बल्कि सुनने, समझने और सम्मान देने से होती है। सहानुभूति, खुले प्रश्न और साझा बिंदुओं के जरिए संवाद को सहयोगी बनाया जाए, तो व्यक्ति आत्मनिरीक्षण करता है और नए विचारों के लिए खुलता है।
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Sunday, January 4, 2026
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Career Tips: बहस को हार-जीत का मंच न बनाएं, बल्कि नए दृष्टिकोण को अपनाने का अवसर समझें
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